Wednesday, August 9, 2017

रामेश्वरम /-Day 8 ....15 जून 17


 जय श्री राम...
4:30 पर सुबह जग कर एक बैग में कपड़े रखकर हम तो तैयार थे पर कुछ नहीं ..बाहर देखा तो भोर का उजाला हो रहा था आसमान में भोर का तारा चमक रहा था ..... 5 :40 पर मंदिर  पहुँच गये....क्यों कि मणि के दर्शन सुबह  6:30 तक ही होते हैं....
एक अन्ना पंडित जी जिनका नाम कालीदास था...हमको इस बात पर विधि विधान से दर्शन करवाने को तैयार हो गये..कि जो श्रद्धा हो दे देना....।
मणि दर्शन का टिकट 50 rs प्रति व्यक्ति था...पैसे लेकर वो टिकट ले आये और सामान भी रख आये ।
ज्यादा बड़ी लाइन नही थी...जल्द ही हमको शिव जी के  बहुत सुंदर से स्फटिक के लिंग के दर्शन हुए....भले ही मूर्ति छोटी थी पर पीछे रखी ज्योति का प्रतिबिंब इसमें  बहुत ही सुंदर नज़र आ रहा था...नज़रें हट ही नही रहीं थी ।
दर्शन करके हम बाहर आये..तो अन्ना भाई समुद्र के पानी से ही स्नान करवा कर प्रक्रिया आगे बढाना चाहे...पर हम सामने सागर में वास्तविक स्नान करने के लिये चल दिये....
समुद्र बहुत शांत रहता है यहाँ ...भक्त स्नान कर रहे थे...हम भी उसी में शामिल हो गये.......!!
एक फोटोग्राफर छोटा कैमरा लिये पानी में ही फोटो लेने में व्यस्त था...हमने भी फोटो खिंचवाये...यहाँ से बाहर निकले तो एक सज्जन शंख पर नाम लिख कर देने का कार्य कर रहे थे जिसका दाम वो 75 rs प्रति शंख बता रहे थे....
अजय भाई ने 20 शंख के लिये पूछा तो वो 50 rs प्रति पर राजी हो गये...बिना advance लिये...नाम क्या लिखना है ये नोट किया...सिर्फ कमरे का पता और फोन no ले सीधे कमरे पर ही आने को बोल दिया..

समुद्र स्नान


भोर का तारा


हम तो तैयार


अब अगला क़दम 22 कुंड का स्नान था जिसके लिये 25 rs प्रति व्यक्ति टिकट था..
जो कि अनिवार्य होता है..और हर तरह उचित भी था...वहाँ हर कुयें पर अन्ना बाल्टी से पानी खींच कर लोगों को स्नान करवाते हैं....कुल 24 कुंड है जिनमें से दो कुंड सूख गए है। 22 कुंडो में पानी है पर स्नान 21 कुंडो पर ही करवाया जाता है क्योंकि 22वें कुंड मे सभी कुंडो का पानी है, अगर कोई 21 कुंडो में स्नान न करना चाहे तो इस एक कुंड में स्नान करना ही पर्याप्त है।इन कुंडो में विभिन्न तीर्थ से लाया गया जल है...जैसे पुष्कर तीर्थ....इसीलिए  रामेश्वरम में सभी तीर्थ स्थानों के स्नान का लाभ मिल जाता है।
विभिन्न पौराणिक चरित्रों के नाम पर यहाँ कुंड है जैसे अर्जुन तीर्थ...  रामसेतु बनाने वालों के नाम - नल तीर्थ और नील तीर्थ।सभी कुंड एक ही स्थान पर नहीं है। पहला कुंड द्वार के पास हनुमान जी और रामजी के मन्दिर के सामने ही है। इसके बाद सभी कुंड पूरे मन्दिर में फैले है। कहीं एक ही कुंड है तो कहीं दो या तीन कुंड भी एक जगह है जैसे गायत्री तीर्थ, सावित्री तीर्थ और सरस्वती तीर्थ साथ-साथ है। अंतिम तीर्थ है गंगा-जमुना। यह देखने में एक ही कुंड लगता है। यह कुंड गोल नहीं लम्बा है.. बीच में दीवार है, एक ओर गंगा का जल और दूसरी ओर जमुना का जल है। हर कुंड के पास नाम और संख्या लिखी है। क्रम से एक के बाद एक कुंड के पास जाकर स्नान किया जाता है।
यहाँ 135 और 245 के vip शुल्क भी थे जिसमें लाइन में नही लगना होता है और ज्यादा पानी से स्नान करवाते हैं...
हमने 6 लोगों के लिये 810 rs देकर 135 वाले स्नान करने का निश्चय किया...।
   पहले कुंड  पर स्नान करते ही मुँह से जय श्री राम का उद्घोष  निकला     ..जब रामजी ने रावण का वध किया तो उनपर ब्रह्मण  वध का आरोप लगा.. जिसको मिटाने के लिये ही राम जी ने ये शिवलिंग स्थापित किया था ..जो रामनाथ स्वामी या रामेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है...ये चार धाम के साथ साथ..ज्योतिर्लिंग भी है....
फ़िर एक एक कर दूसरे और तीसरे कुंड पर .स्नान कर एक बड़े से गलियारे में जय भोलेनाथ...जय श्री राम के जयकारे लगाते हुए बढ़ते ही जा रहे थे....हमने प्लास्टिक के दो छोटे कैन ले लिये थे जिसमें 22 कुंड का  जल भी लेते जा रहे थे....
सच में ऐसे भक्ति आनँद की कल्पना भी नही की थी ...हम अब तक पुरी और द्वारका धीश जी...दो धाम और 9 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चुके थे पर ये आनँद अतुलनीय था.....कई कुंड  पर हमारे अन्ना भाई भीड़ की वजह से खुद ही पानी भरकर नहला देते थे.......एक कुयें पर एक अन्ना ने हँसकर हमसे पैसे माँगे...हमने दे भी दिये तो कालीदास उससे झगड़ पड़े और गुस्से से बोले मत दीजिये 135 में इन सबको मिलेगा... वो अन्ना अब भी मुस्कुरा रहा था...उसने अपनी तमिल में कुछ कहा...हमने एक और नोट उसको दे दिया.... तो अब हमारे अन्ना भी हँस पड़े....
   लगभग 30 मिनिट में हम स्नान कर कपड़े बदले  और फ़िर दर्शन के लिये रामनाथ स्वामी के उसी मंदिर में आये जहाँ मणि दर्शन किये थे....मणि को सुबह द्वार पर स्थापित कर देते हैं फ़िर 6:30 के बाद रेत के शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं..यहाँ 501रु देकर परिवार संग ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल से अभिषेक किया...अजय भाई बद्रीनाथ जी से गंगा जल लाये थे जो पीतल के छोटे से लोटे में कलाई लगाकर  इतनी अच्छी तरह पैक था कि कई साल बाद भी पूरा पानी वैसे ही था.. माता  पार्वती जी के आठों रूपों   - धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, वर लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी के दर्शन किये... विष्णु भगवान के दर्शन किये ।
    हमारे पंडित जी जो दो घंटे से हम लोगों को विधिवत दर्शन करवा रहे  थे...उनकी दक्षिणा की बात आयी तो उन्होने कहा यहाँ खेती  नही है...जीविका के लिये या तो मछली का शिकार या पूजा ही साधन है ..सच में ..रामेश्वरम् एक सुन्दर टापू है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी इसको चारों ओर से घेरे हुए है।
उन्होने हमसे चावल देने को कहा ...यहाँ के लोगों की बातचीत में एक कसक सी थी... हमने उनको खुशी से 1100 rs दिये....कल के गाइड को भी मैने 400 पर तय करके  500 दिये थे....यही हम हिन्दुओ का धर्म है..यही पूजा का उद्धेश्य है...हमारी नज़र में......जरूरतमंद को दो पैसे ज्यादा दे दो....यही असली दान है....शायद इसीलिए ईश्वर ने हमें सक्षम बनाया हो या हो सकता है यहीं आपकी परीक्षा हो रही हो ॥
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रामेश्वरम धाम था जिनके भव्य दर्शन मिल चुके थे...मंदिर से बाहर आकर हमने नाश्ता किया और कमरे पर पहुँचे...हमलोग तैयार हो गये...पर अजय भाई अपना बटुआ लेकर मंदिर गये थे और वो पॉलीथीन में रखा होने के बावजूद पूरा भीग गया था....
2000 के नोट और सारे डॉक्युमेंट...अब  बैठे सुखा रहे थे....
टाइम था तो हम दोनो बाप बेटे... दूसरी मंजिल पर जाकर सागर की फोटोग्राफी में तल्लीन हो गये.....यहाँ मछुआरे जाल डाल रहे थे.....कई बोट चल रही थी....उनकी मैंने बहुत सी pic ली.....नीचे एक भइया whatsup पर इस कदर busy थे....कि आधे घंटे सर उठा कर भी नही देखा कि आसपास क्या हो रहा है....क्या रोग लग गया है हम लोगों को कि....
बिना पाटा तो बैठ सकते हैं
मगर बिना डाटा नही बैठ सकते ..।
मन ही मन मुस्कुरा कर नीचे आ गया...
तब तक शंख वाले भैया शंख पर नाम भी लिख कर ले आये थे.......रूम का पेमेंट कर हम सामान ले चल दिये तो देखा मेरा वीर बेटा अकेले ही दो बैग लिये था...हमारे माँगने पर भी नही दिये.....
टैक्सी कर हम पार्किंग पहुँचे सामने ही tv टावर था पर वहाँ घूम नही पाये थे तो उसकी pics ही ले ली....।
यहाँ से विदा ले हम कन्याकुमारी की ओर बढ़ चले....।
जय भोलेनाथ ।


समुद्र की  ओर  के  गोपुरम





बांगड़ यात्री निवास कि गैलरी से मंदिर


जाल डालते हुए मछुवारे











मुख्य मछुवारा





चरवाह


दूर का छोर

मोटर बोट



आज का जूनून


चलो चले कन्याकुमारी


नारिअल पानी

फिल्मो वाली टैक्सी


मज़े लो सफ़र के

मैं ले चलूँगा


कार पार्किंग से दिखता टीवी टॉवर





सोने सा चमकता पार्किंग के पास एक मंदिर



14 comments:

  1. इस यात्रा का सबसे बेहतरीन स्थल ....

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  2. जी भाई निसंदेह ....!!
    theme से change किया अब कैसा दिख रहा भाई ?

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  3. बहुत ही बढ़िया और रोचक विवरण, आपकी यात्रा पढ़कर मुझे अपनी यात्रा की याद आ गई। वो शांत समुद्र बहुत ही मनभावन

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  4. आपकी पोस्ट ने ही मेरेD दर्शन करवा दिए।

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  5. संतोषभाई चारधाम में से एक धाम रामेश्वरम जी की दर्शन और विवरण देने के लिए धन्यवाद,
    शानदार भाई

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    1. जी वसंत भाई आभार आपका ।

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  6. बहुत बढिया मिश्रा जी।फोटो कैप्शन मजेदार हैं।

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  7. मजेदार यात्रा संतोष जी
    और रंग तो नही उतरा 2000 के नोट का😂😂

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    1. धन्यवाद अजय भाई

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    2. पूरी तरह धुला नही था तो बच गये ।

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