Thursday, August 10, 2017

रामेश्वरम से कन्याकुमारी /-Day 8.....15 जून 17


जय श्री राम...
हम 10:45 पर हम पामबन ब्रिज पर थे.....यहाँ का नजारा इतना सुंदर है कि बिना रुके कोई गुजर नही सकता......कुछ pics ली और चल दिये कन्याकुमारी..जो  यहाँ से 325 km दूर था...।
    रास्ते में हमें नारियल के खोपरे से भरी एक गाड़ी दिखी...नारियल और ताड़ यहाँ के मुख्य पेड़ हैं.....यहाँ ताड़ के लाखों पेड़ होंगे...ताड़ का गुड़ बेचते हुए लोग मिले........100 किलो ताड़ी से औसतन 10 से 12 किलो गुड़ तैयार होता है। ताड़ का गुड़ गन्ने के गुड़ की तुलना में ज्यादा फायदेमंद होता है तथा इसमें औषधीय गुण भी पाये जाते हैं।
यहाँ ऊपर से छतरी नुमा बबूल के पेड़ बहुत थे.. थोड़ा सा ही चले होंगे कि एक जगह रंग बिरंगे प्लास्टिक के घड़े रखे थे....जिनको औरतें पानी के लिये लाइन से रखे हुए थी....पानी ले जाने के लिये इन्होने एक गाड़ी सी बना रखी थी...जिसे पीछे से धकेल कर चलाया जाता है.....
एक औरत हमारे सामने ही गाड़ी लेकर आयी और भीड़ देख वापस चली गयी ...मेरे लिये आश्चर्य था..सागर के इतना करीब पानी की कितनी  मारामारी थी...
आगे हमें नमक के खेत मिले......समुद्र के पानी को मेड़ बनाकर रोक लेते हैं फ़िर उसको पैरों से रौंदते हैं...जिससे नमक ऊपर आ जाता है..ये बहुत मेहनत का काम है....नमक के खेतों में काम करने वाले लोगों के  हाथ और पैर इतना ऐंठ जाते हैं कि चिता में भी नही जलते..सुनकर रूह काँप उठे..पर  लोग पेट के लिये कुछ भी करते हैं...!!

तमिलनाडु के कई  हाईवे पर इमली के बहुत पुराने पेड़ लगे हैं जिनमें इस समय पकी हुई इमली लगी थी...एक जगह रुककर हमने तोड़ी भी... यहाँ इमली का  भरपूर सेवन  होता है...पास ही पेड़ के नीचे भेड़ का बाड़ा बनाये थे...जो कि यहाँ का एक व्यवसाय है...

woooooooooooooooow

पामबन पुल

नारियल के खोपरे

बबूल के पेड़ ऊपर से फैले हुए

ताड का गुड

समुद्र के इतनी नजदीक पानी की ये स्थिति 


अभी आई ये औरत जायजा लेती हुई


बहुत देर लगेगी तो वापस चली गयी

नमक के खेत जिनमे अभी पैरो से चलकर नमक बनेगा

तैयार नमक के खेत



मेहनत करता मजदूर 


इमली तोड़ने का प्रयास

पेड़ पर पकी इमलियाँ


रामेश्वरम से तिरुनेलवेल्ली  के बीच का एक गाँव


      

भेड़ पालक

 वैसे तो तमिलनाडु के टू लेन भी बहुत बढ़िया हैं...पर कोविलपट्टी से हमें गजब की फोरलेन रोड नॉर्थ साउथ कॉरीडोर मिल गयी ......ढाई बजे  तिरुनलवली से 30-35 km पहले हमें right hand पर एक बहुत बढ़िया रेस्टोरेंट दिखा और आगे कट भी था
तो गाड़ी मोड़ हम रुक गये.      रेलगाड़ी..बैलगाड़ी ..दो ऊँट बहुत सारी चिड़िया.. दो ऊँट एक्वेरियम...बालरूम...सुंदर सा लान...छोटे से  पार्क सा विकसित  किया है इसे...बच्चों का ful enjoyment था यहाँ...
...वैसे तो चावल तमिलनाडु का प्रमुख भोजन है,  चावल के बने व्यंजन... दोसा, उथप्पम्, इडली बहुत खायी जाती हैं ...जिन्हे केले के पत्ते पर परोसा जाता है.. मिर्च-मसालों का
खूब प्रयोग होता है....पर यहाँ के रेस्टोरेंट में आपको उत्तर भारतीय खाना भी मिल जाता है .यहाँ खाना भी लाजवाब था...स्टाफ और सर्विस भी काबिलेतारीफ...rates भी स्तर के हिसाब से ठीक ही थे....।।capsi नाम था...!!

रेस्टोरेंट अच्छा था


छोटी ट्रेन और बैलगाड़ी

बच्चो के लिए मुफीद जगह



swinging बम्बू पुल


हमरा भी फोटू ले लेव


सुन्दर पक्षी भी थे

पक्षी देख थकान ख़तम


हालीवुड स्टार वान डैम के साथ एक pic


सुदर जोड़ी


Nanguneri के आसपास से ही हमें मौसम में परिवर्तन दिखने लगा...दाहिने हाथ पर पश्चिमी घाट की पहाडिय़ा नज़र आ रही थी .....नारियल के पेड़ों में चमक साफ दिख रही थी.....तेज हवा चलती है यहाँ...थोड़ा सा आगे बढ़े तो हर तरफ़ windmils ही नज़र आने लगे...विंडमिल यानि  पवनचक्की..वह मशीन है जो हवा के बहाव की उर्जा लेकर विद्युत उर्जा उत्पन्न करती है...इससे बिजली बनती है...ये उन स्थानों पर लगाये जाते है..जहाँ हवा तेज और नियमित रुप से चलती हो...जैसे समुद्र के आसपास...गुजरात में भी हमने देखे थे .पर बहुत कम थे...यहाँ तो अनगिनत थे...इसी वजह से तमिलनाडु पवन ऊर्जा के मामले में no 1 है...

विंड मिल्स के साथ


चारो तरफ पवनचक्की


हम कन्याकुमारी 5:30 पर पहुँच गये..पर स्वामी विवेकानंद आश्रम ढूँढ़ने में टाइम लगा जो कि नरेंद्र भाई ने ही suggest किया था गूगल विवेकानंद लॉज दिखा रहा था....खैर हम उसी लॉज में आगे से घूमकर पहुँचे.....बहुत सुनियोजित और शांति वाली जगह थी ये...बहुत बड़ा आश्रम है...यहाँ मौसम ठंडा रहता है...तो साधारण कमरे ही लिये 770 rs में थ्री बेड.....!!
       हम को यहाँ बस थोड़ी सी मायूसी हुई जब काउंटर क्लर्क ने बताया कि  विवेकानंद राक 4 बजे बँद हो जाती है...
तिरुवल्लुवर प्रतिमा पर कुछ काम चलने की वजह से नही जा सकते.....
फ़िर भी हम तैयार होकर पहले sun set पॉइंट पहुँचे.... april से अक्टूबर तक  यहाँ से सूर्यास्त नही दिखता....पर समुद्र तो अपने आप में दर्शनीय होता है...और यहाँ तो हम भारत के अंतिम छोर पर थे....अपने घर से अधिकतम दूरी पर....
एक सपना पूरा हो गया था...  घूमते घामते लगभग  3700 km अपनी गाड़ी खुद चलाकर  हम कन्याकुमारी पहुँचे थे....
शाम ढल रही थी...फोटो ग्राफी जारी थी कि एक बुलेट पर पर बैठे युवक ने अपना मोबाइल आगे बढ़ाते हुए कुछ फोटो लेने की req की...तो मैंने उससे बोला कि अपने कैमरे से क्लिक करता हूँ  अपना whatsup no दो send कर दूँगा...मैंने उसकी कई pic ली....no लेते हुए उसका adress पूछा तो बन्दा बोला sir मैं दिल्ली से solo ड्राइव करते हुए आया हूँ...
मुझसे भी 500 km आगे से..वो भी बुलेट से...और अकेले.....मुझे लगा मैंने गलत आदमी पर अपना टाइम जाया नही किया था...।
हमारी पब्लिक गुम थी...बल्कि ये कहो... अपने में मगन थी मैं और बेटा दोनो पानी के पास पहुँचे...और कुछ pics लिये...तभी एक आदमी जाल पर कुछ मोती रखे हुए आया...मैंने rate पूछा तो हाथ में 6 मोती लेकर एक का इशारा किया...मैंने गिने वो 24 मोती थे मैंने सबके दाम 200 बोले तो उसने 400 ही इशारा किया...और चल दिया..मैंने पीछे से 300 बोला तो वो नही पलटा...बेटे ने दौड़ कर रोका तो पता चला वो गूँगा और बहरा था.....हमने 400 दिये और ले और सारे मोती ले लिये....हमने बेटे से कहा अगर नकली भी हुए तो कोई बात नही...इसे पैसे मिल गये....तभी चश्मे बेचता हुआ एक आदमी जो मेरी बात सुन  रहा था उसने मोती हाथ में लिया और पत्थर पर रगड़ कर देखा और बोला नकली नही हैं...।।


जोरदार समुद्र

मन को छू लिया

मंजिल पर पहुचे हम

हम भी तो हैं

यहाँ सब खो गये


पहली बार ऐसी नाव  देखी


सनसेट व्यू पॉइंट


धूप.. बारिशसे बचने की  छतरी


समुद्र के अनमोल रत्न



Add caption


सुन्दर कलाकारी

समुद्र के अनमोल रत्न

सुन्दर दृश्य



दिल्ली से कन्याकुमारी सोलो ड्राइविंग



मोती


  तब तक हमारी श्रीमती जी भाभी के साथ आ गयी और हम कुमारी माता के दर्शन के लिये चल दिये.....यहाँ गाड़ी चलाने में दिक्कत हो रही थी windscreen पर अंदर बाहर fog सी जम रही थी...खैर थोड़ी ही दूर पर मंदिर था...
सागर के मुहाने के दाई और स्थित यह एक छोटा सा मंदिर है जो पार्वती को समर्पित है। मंदिर तीनों समुद्रों के संगम  "त्रिवेणी संगम "स्थल पर बना हुआ है... लहरों की आवाज  संगीत  सी सुनाई देती है...  मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार हमेशा बंद करके रखा जाता है क्योंकि मंदिर में स्थापित देवी के आभूषण की रोशनी से समुद्री जहाज इसे लाइटहाउस समझने की भूल कर बैठते है और जहाज को किनारे करने के चक्‍कर में दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाते है।
             यहाँ फूल माला लिये और माता के दर्शन किये....देवी की नथ में जड़ा हुआ शुद्ध कीमती हीरा दूर तक अपनी जगमगाहट बिखेरता है। माता रानी का आशीर्वाद लेकर हम बाहर आये....रास्ते में एक बोर्ड पर nikon लिखा देखा तो याद आया कैमरे का कार्ड भरनेवाला है....कार्ड खरीदा और विवेकानंद आश्रम आ गये यहाँ कैंटीन में खाना खाया और जल्दी ही सो गये क्यों कि सुबह सूर्योदय देखना था....कन्याकुमारी का सूर्योदय....
The world's  best sunrise.....!!
जय श्री राम ।।

13 comments:

  1. फोटो और यात्रा वृत्तन्त एकदम बढ़िया,
    बहुतही ख़ूबसुरत नजारे

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    1. वसंत भाई धन्यवाद

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  2. बहुत बढिया यात्रा वृतांत है।

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    1. अनिल भाई धन्यवाद

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  3. बहुत बढ़िया लेख।

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  4. बहुत बढ़िया संतोष जी

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    1. धन्यवाद अजय भाई

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  5. एकदम मस्त एकदम मस्त...

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  6. ताड का गुड भी बनता है, मेरे लिये ताजी ताजी जानकारी है।
    यहाँ नमक की खेती भी नया है मेरे लिये।

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  7. जी भाई बहुत स्वादिष्ट होता है ...
    नमक के खेत होते हैं ...गुजरात में भी देखे थे हमने ।

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  8. बहुत ही बढ़िया जानकारी भरा विवरण शानदार

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