Friday, August 11, 2017

कन्याकुमारी/-Day 9......16 जून 17

जय श्री राम...
आज सूर्योदय का समय 6 बजे था इसीलिए सुबह 5 बजे हम जग गये...आँख खुलते ही नज़र विवेकनद कि फोटो पर पड़ी जो कि लॉज के कमरे में लगी थी .....विवेकानंद आश्रम काफी बड़े एरिया में बना है...जिसमें मंदिर भी है....मैदान भी...बर्ड सेंचुरी भी है और  विवेकानंद आश्रम का अपना बीच भी है..जहाँ से सूर्योदय देखा जा सकता है....और इसी वजह से हम यहाँ रुके भी थे ...हम पैदल ही समुद्र की तरफ़ चल दिये यहाँ रोड पर . लोकेशन बताने वाले बोर्ड लगे थे...रास्ते में एक जगह काफी सारे लोग योगा कर रहे थे...
 

महान व्यक्तित्व

रास्ता बताने वाले इंडिकेटर

योगा करते हुए लोग

सुन्दर रास्ते


लगभग 7-8 सौ मीटर चलकर हम बीच पर पहुँच गये....वहाँ काफी जन पहले से ही थे...वंश थोड़ा आगे था वो पहले ही पहुँच कर ट्राई पॉड सेट कर रहा था...एक बंधा सा बना रखा था ,जहाँ लोग नीचे उतर कर जा रहे थे पर हमें यही से ठीक लगा....
सूर्योदय दिन का एक सौंदर्य होता है सारा आकाश सिन्दूरी रंग से भरा हुआ था..हल्की  ठंड भी थी वहाँ..मेरे कैमरे की सेटिंग नही आ पा रही थी...ऑटो मोड पर सूरज के pic नही आ पाते..reset किया खैर ठीक समय पर सेट हो गया ...

यहाँ तो पहले से ही पब्लिक है 

अलमस्त सुबह

ओउम शांति शांति शांति

सागर किनारे एक सुबह

इनकी तो आँख सागर में ही खुलती है


सूरज ने ठीक 6बजकर 2 मिनट पर जलराशि से बाहर अपना चेहरा निकाला...हर क्षण ऊपर उठता दिख रहा था...आप उसे चलता हुआ महसूस कर सकते हैं...6:05 पर पूरा बाहर था...बमुश्किल 150 सेकेंड का scene था...पर क्या दृश्य था !! सूर्योदय और सूर्यास्त के समय हमें सूर्य बड़ा दिखता है क्यों कि .. उस वक्त उसकी किरणें हल्की होती...ऐसे में वो पूरा दिखता है....फ़िर रोशनी बढ़ने के साथ ही उसका मध्य भाग ही हम देख पाते हैं....nikon के p900 में  83* ऑप्टिकल जूम होता है..साधारण भाषा में कहे तो 83 गुना नज़दीक जो ऐसे अवसर पर फोटोग्राफी में असाधारण सहयोग करता है......हर क्षण की एक तस्वीर ली मैंने...

इंतजार ख़त्म

पलक झपकते ही आधा बाहर

गति दिख रही थी

शानदार सूरज

सूरज कि रोशनी बढ़ी तो बाकी में अँधेरा दिखने लगा

 


बादल गले मिलने आ गये

लुकाछिपी


बस कुछेक मिनिट में किरणें तेज होने लगी और pic dark होने लगीं  और फ़िर तो बादलों ने ही सूरज को अपने आगोश में ले लिया...

   अब हम सागर में खो गये....यहाँ से विपरीत दिशा में सामने ही विवेकानंद रॉक और तिरुवल्लुवर प्रतिमा दिख रही थी....कुछ औरतें समुद्री चीजों की दुकान सजाये बैठी थी...हम सब शानदार जगह का आनँद ले रहे थे..तभी चौकीदार ने सीटी बजाकर सबको बाहर निकलने को बोला...क्यों कि सात बजे बीच बँद कर देते हैं...
   हमें लौटते समय मोर दिखे...एक तो नाच रहा था  .. shit जब तक कैमरा on करते वो भाग लिया....!!

विवेकानंद रॉक


तिरुवल्लुवर प्रतिमा


बीच से दीखता कन्याकुमारी शहर

समुद्री सामान बेचती महिलाएं 



सुबह की खुमारी साफ दिख रही थी

she ,he & sea



विवेकानंद आश्रम के पास एक मंदिर 


आश्रम में बर्ड सेंक्चुरी भी है

फुल लेंथ में


आगे सुबह सुबह अम्मा लोग दही/मट्ठा  बेच रही थी....आश्रम में निवास की  जो इमारतें बनी थी उनके नाम धार्मिक जगहों के नाम पर थे....हम द्वारका में रुके थे.....बहुत मनमोहक जगह है ये आश्रम....मुझे तो होटल से ज्यादा पसंद आयी...
यहाँ की कैंटीन में ही नाश्ता कर हम पद्मनाभम स्वामी केरल के दर्शन के लिये चल दिये जो लगभग 90 km था....

काम पर जाते हुए मजदूर


इससे अच्छे स्थान पर हम कभी नही रुके


इतनी सुबह दही ना बाबा ना


कन्याकुमारी में dwarka में रुकने  का आनंद 


आश्रम में हनुमान जी का मंदिर


विवेकानंद आश्रम का मुख्य द्वार अन्दर से


यात्रा के तीसरे दिन हमने उत्तरी तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले से प्रवेश किया था फ़िर चेन्नई -कांचीपुरम -वेल्लोर -तिरुवँनामलाई -विल्लूपूरम- कुड्डालुरु -तँजावुर -
तिरुचिरापल्ली -मदुरै-रामनाथ पुरम -तूतूकुड़ी -तिरुनेल्वेली फ़िर कन्या कुमारी तक पूर्वी और दक्षिणी तमिलनाडु में घूमते हुए हमारा सातवां दिन था....केरल से लगती हुई पश्चिमी घाट की पहाडिय़ा यहाँ दक्षिणीपश्चिमी (जून जुलाई के) मानसून को रोक देती हैं...जिससे इसके मध्य भाग में कम वर्षा होती है यहाँ पूर्वीउत्तरी मानसून सर्दियों में  ज्यादा पानी बरसाता है.. पूर्वी भाग बहुत उपजाऊ हैं...गर्मियों में यहाँ गर्मी होती है पर उत्तर प्रदेश से काफी कम...बारिश में मौसम ठीक रहता है इसीलिए हम plan कर थोड़ा late आये यहाँ...सर्दियों में तो सबसे मस्त मौसम होता यहाँ ....
तमिलनाडु महाराष्ट्र के बाद सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य है...कर्नाटक के बाद सबसे बड़ा IT सेक्टर यहीं है....यहाँ देश में  सबसे ज्यादा 50% शहरीकरण है ...कावेरी नदी के द्रोणी को "दक्षिण भारत का चावल का कटोरा" कहा जाता है ये केलों और फूलों का सबसे बड़ा, आम, रबड़, मूंगफली, नारियल का दूसरा सबसे बड़ा और कॉफ़ी का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
यहाँ के मंदिर पूरे भारत के सबसे शानदार हैं कोई शक ही नही...मैदानी समुद्री पठारी पर्वतीय सारे इलाके  यहाँ आपको मिलेंगे... अभी तक पर्वतीय भाग को छोड़ हमने बाकी सब  घूम चुके थे ...केरल के बाद हमारा  कोयम्बटूर और ऊटी तमिलनाडु के पर्वतीय क्षेत्रों को घूमने का प्रोग्राम था....
अभी तो केरल......!!
जय श्री राम !!

13 comments:

  1. कन्याकुमारी में सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों देखने का सौभाग्य मिला है घरवाली के साथ,
    ऊटी व केरल अपना भी बचा है।

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    1. जी भाई सूर्योदय हमेशा ..पर सूर्यास्त october से मार्च तक ही दिखता है ..।
      केरल ..ऊटी में कुछ घूम लिया था ।

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  2. सूंदर विवरण है भाई सूर्य देवता के फोटो भी शानदार है

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  3. जी लोकेंद्र भाई धन्यवाद

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  4. शानदार सूर्योदय ओर सभी फोटो सूंदर

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    1. धन्यवाद वसंत भाई

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  5. विवेकानंद आश्रम में रुकने पर भोजन मिल जाता है क्या। फेरी घाट से कितना दूर है ये। आपके विचार से यहाँ रुकना बेहतर है। ऑटो रिक्शा मिल जातें हैं।

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    1. जी ब्लॉग में सब लिखा है ...

      कैंटीन है ...
      समुद्र का इनका अपना बीच है ...जहाँ से सूर्योदय देख सकते हैं ..!
      on रोड है सब साधन मिलेंगे ।

      मुझे बहुत अच्छा लगा ...270 rs का बेड मिल जायेगा ।
      770 का थ्री बेड रूम है ।

      बेहतरीन रुकने की जगह ।

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  6. सूर्योदय की तसवीरें बडी जबरदस्त लीं आपने। वाह कमाल कर दिया।

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    1. जी मनजीत भाई धन्यवाद

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  7. सूर्य देवता की फोटो गजब की है ....होटल में रुकने का विस्तृत विवरण दें कितना रुपया लगा कैसी जगह है अंदर के कमरे का दृश्य हो तो और भी अच्छा होगा.....फोटो सब शानदार आये हैं

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